खुले चैनल पर पुकार भेजी गई, सपाट और रस्मी, पहले की हज़ारों पुकारों जैसी।
“West L6F, 54-6UE2 कंट्रोल स्टेशन, फ़ॉल फ़ेंडर बोल रहा है। आपके पास वाले खुले सेक्टर में उतरने की अनुमति चाहिए। TG-6.6, वेक्टर 0.65, ग्रिड 732 बाई 1432।”
जवाब आया, दूरी से मद्धम पड़ी आवाज़ में। “समझ गए, फ़ॉल फ़ेंडर। स्थितियाँ स्वीकार्य दिख रही हैं। प्रतीत होता है कि आपके द्वारा दी गई जानकारी आपकी संस्था द्वारा हमारे यहाँ दर्ज कराई जा चुकी है। आपको अनुमति दी जाती है।”
ट्रैस्कॉट कंसोल की ओर झुका, उस आदमी की सहज गर्मजोशी से, जिसने ज़िंदगी में एक बार भी ‘ना’ नहीं सुना था। “आह, शुक्रिया। आपके इस प्यारे, शिष्ट, नन्हे-से भाषण के लिए मैं तहे-दिल से आभारी हूँ।”
दूसरी तरफ़ ख़ामोशी। कंट्रोलर दोबारा बोला तो उसकी आवाज़ का कसाव कुछ ढीला पड़ चुका था। “आह। जी। ख़ैर। आपकी यात्रा सुखद रहे।”
“बड़ी मेहरबानी, ऑफ़िसर।”
चैनल पर बस खरखराहट रह गई।
व्यूपोर्ट के पार ग्रह घूम रहा था। सैकड़ों किलोमीटर तक उस पर हरियाली फैली थी, और पेड़ों की छतरी के बीच-बीच में ऐसी संरचनाएँ खड़ी थीं जो किसी भी जानी-पहचानी शक्ल में ढलने से इनकार करती थीं। बस्तियाँ नहीं। ठीक-ठीक खंडहर भी नहीं। ऐसी आकृतियाँ जिन पर नज़र टिकती ही नहीं थी, फिसल जाती थी। हरियाली के बीच ऐसे टुकड़े थे जहाँ कुछ भी नहीं उगता था, काले और सपाट और कुछ इस तरह अस्वाभाविक कि रोशनी से इसकी कोई वजह समझ नहीं आती थी।

स्टेशन कक्षा में टँगा था, और फ़ॉल फ़ेंडर को बस वहीं तक जाने की इजाज़त थी। यहाँ से आगे शटल से ही जाना था।
वजह थी शील्ड। नीली ऊर्जा की एक झिल्ली ग्रह को लपेटे हुए थी, बिना किसी जोड़ के, सीधे स्टेशन से बँधी हुई, और उसके आर-पार आने-जाने का बस एक ही रास्ता था।
डॉक पर सैनिक उनका इंतज़ार कर रहे थे। दिखावे का पहरा नहीं। बाक़ायदा तैनाती।
“देवियो, अब हम ऊँचे लोगों की दुनिया में क़दम रख रहे हैं,” ट्रैस्कॉट ने ऐलान किया। “तैयार हो जाइए।”
“समझ गई, कैप्टन,” फ़ेलिन ने कहा।
“सर,” हेल्म ऑफ़िसर ने कहा, “हम शटल में चढ़ रहे हैं।”
दो सैनिक उन्हें शटल में ले गए। दोनों में से किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया।
“शुभ संध्या, सज्जनो, देवियो।” ट्रैस्कॉट झुककर हैच से अंदर आया। “आते वक़्त मेरे काग़ज़ात मंज़ूर हो चुके थे। कोई दिक़्क़त है?”
सैनिक ने उनकी लोकेशन पूछी। फिर उसने दस्तावेज़ों वाला टैबलेट लिया और उसे किसी टॉफ़ी के रैपर की तरह एक तरफ़ उछाल दिया।
“इन्हें लोकेशन बता दो, बी,” ट्रैस्कॉट ने कहा।
ब्रैंडन फ़्यूरी की नज़रें डेटापैड पर ही टिकी रहीं। “TG-6.6, वेक्टर 0.65, ग्रिड 732 बाई 1432। हमने यहीं उतरने की अनुमति माँगी थी। बंजर ज़मीन है। मेरा ख़याल है, आप तो उसे जानते ही होंगे।”
दूसरे सैनिक ने ट्रैस्कॉट के कंधे पर हाथ रखा और उसे उसकी सीट की तरफ़ ठेल दिया। बातचीत वहीं ख़त्म हो गई। कंट्रोल पर बैठे सैनिक ने दरवाज़े सील किए और शटल को उसके रास्ते पर डाल दिया।
खिड़कियों से दिखती, पास आती ज़मीन क़तई ख़ाली नहीं थी। दूसरी फ़ौजी शटलें पहले ही उतर चुकी थीं, पूरे इलाक़े में बिखरे कैंपों के पास, जिनका आपस में कोई संबंध नज़र नहीं आता था।
“लगता है, मिलनसार क़िस्म के लोग नहीं हैं,” ट्रैस्कॉट ने कहा।
फ़ेलिन खिड़की से बाहर ही देखती रही। “हम भी कहाँ हैं। मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, टी।”
“मैं तो बेहद मिलनसार हूँ,” ट्रैस्कॉट ने कहा।
नीचे उतरने के बाक़ी पूरे रास्ते सैनिक कुछ नहीं बोले। न उनसे, न आपस में।
“ओहो। ज़रा देखो तो,” ट्रैस्कॉट बुदबुदाया। “ये लोग सच में पूरा कूल-बंदों वाला स्टाइल मार रहे हैं।”
“हम्म। हाँ। बिल्कुल।” फ़ेलिन फिर खिड़की की ओर मुड़ गई।
ज़मीन ऊपर उठती चली आई।
ट्रैस्कॉट एक मिनट और टिक पाया, फिर ख़ामोशी ने उसे हरा दिया। “तोओओ। सज्जनो। देवियो। काम कैसा चल रहा है? आप लोग कुछ ख़ास मज़े में नहीं लग रहे। छुट्टी-वुट्टी ठीक से नहीं देते क्या?”
कुछ नहीं। बदन में ज़रा-सी हरकत तक नहीं।
“ऊऊह। साइलेंट मोड।”
“तुम कभी चुप भी होते हो?” फ़ेलिन ने कहा।
शटल ने ज़मीन छुई। फुस्स की आवाज़ के साथ दरवाज़ा खुला।
“कभी-कभार,” ट्रैस्कॉट ने मुस्कुराते हुए कहा।
जो सैनिक पूरे रास्ते खड़ा रहा था, वह सबसे पहले नीचे उतरा और इंतज़ार करने लगा।
“मेरे ख़याल से यह हमारे लिए इशारा है।”
वह रैंप से उतरा और चलता गया, बाक़ी सब उसके पीछे हो लिए। उधर पीछे, सैनिक वापस अंदर चढ़ा और शटल बिना किसी तामझाम के उड़ गई।
बंजर ज़मीन का किनारा ख़त्म होते ही हरियाली शुरू हो जाती थी। और आगे, पानी।
“बी, जहाज़ को यहाँ नीचे बुला लो, ताकि ये लोग ऊपर से हमें घूरना बंद करें,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “तुमने इन्हें बता तो दिया था ना कि हम अकेले नहीं हैं? वैसे जहाज़ तो इन्होंने अच्छे से देख ही लिया है। हमारे लोग तो ये पहले ही गिन चुके हैं।”
“आह, जी सर,” ब्रैंडन फ़्यूरी ने कहा। “मेरा ख़याल है, सबसे आख़िर में उन्होंने हमारे क्रू की ही जाँच की थी।”
ट्रैस्कॉट ने आँखों पर हाथ की ओट की। “वह हमारा वाला आ रहा है क्या? लगता है, उन्होंने उसे नीचे भेज दिया।”
जहाज़ आया। जैसे ही वह ज़मीन पर टिका, उसके ढाँचे पर सबूत साफ़ दिखने लगे। पैनल ज़रा-ज़रा से अपनी जगह से खिसके हुए। टूटा कुछ नहीं। छुआ सब कुछ गया।
“मेरी पूरी कूल एंट्री, चौपट,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “देख रही हो, फ़ेलिन? अब मैं उदास-सा मुँह बनाने वाला हूँ।”
“इन्होंने थोड़ी उलट-पलट की है, सर,” ब्रैंडन फ़्यूरी ने कहा। “मेरे हिसाब से, कुछ ढूँढ रहे थे।”
“अगर इन्होंने मेरी चीज़ों को हाथ लगाया है,” फ़ेलिन ने कहा, “तो पछताएँगे।”
वे जो कुछ भी ढूँढ रहे थे, वह उन्हें मिला नहीं था।
“ओहो। यह वाली कभी-कभी बड़ी ख़ूँख़ार हो जाती है,” ट्रैस्कॉट ने कहा।
“जी सर,” ब्रैंडन फ़्यूरी ने हामी भरी। “थोड़ी-सी।”
ट्रैस्कॉट सबसे पास खड़े क्रू-मेंबर की ओर घूमा। “तुम। क्या नाम है तुम्हारा?”
“रैपसन, सर!”
“रैपसन!”
“जी, सर!!”
“यहाँ आख़िर हुआ क्या है? ये लोग ढूँढ क्या रहे थे, लेज़र चार्ज? ऐसा ही कुछ?”
“पता नहीं, सर।” रैपसन की नज़रें सामने ही टिकी रहीं। “पर उन्होंने चप्पा-चप्पा छान मारा।”
अजीब बात यही थी। हथियारों में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। न रैकों में, न बक्सों में। वे किसी ख़ास चीज़ के लिए आए थे।
कोई एक चीज़।
“उन्होंने हथियारों की तरफ़ देखा तक नहीं, सर,” रैपसन ने कहा। “जैसे वे किसी बिल्कुल ही दूसरी चीज़ के पीछे हों।”
“हम्म।” ट्रैस्कॉट ने अपनी ठुड्डी सहलाई। “अजीब है। शायद वे मेरा खोया हुआ दिल ढूँढ रहे थे। है ना, रैपसन? है ना?”
“आह। उम्म। जी सर।”
ट्रैस्कॉट ठहाके मारते हुए दोहरा हो गया।
“दिल मिल गया हो तो चलें, हीरो,” फ़ेलिन ने कहा। “बहुत हो गया शोर। काम करना है।”
“जो हुक्म। सुपर मिशन वुमन।” वह रैपसन के बग़ल में क़दम मिलाकर चलने लगा और आवाज़ धीमी कर ली। “मज़ाक़ कैसा था?”
“अच्छा था, सर। हें-हें। हें-हें।”
वे हरियाली की ओर चल पड़े।
पास पहुँचते-पहुँचते जंगल का असली रूप सामने आया। पेड़ आसमान से जितने दिखे थे, उससे कहीं ऊँचे और कहीं ज़्यादा घने थे। जो थोड़ी-बहुत रोशनी छतरी को भेदकर आती थी, वह ज़मीन तक नहीं पहुँचती थी।
“रेगिस्तान के बीचोबीच हरियाली और जंगल,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “वाह, ज़रा देखो तो। मुझे तो अभी से इस जगह से प्यार होने लगा है।”
“हर ग्रह की अपनी वनस्पति होती है, ट्रैस।” फ़ेलिन की रफ़्तार कम नहीं हुई। “यह आम बात है। ऐसे कर रहे हो जैसे कभी घर से निकले ही न हो। बैंगनी बर्फ़ की चादर और पीली बारिश के मुक़ाबले तो यह लगभग बग़ीचा है।”
ट्रैस्कॉट के पूरे बदन में झुरझुरी दौड़ गई। “उफ़्फ़। हाँ। वो। पूरे एक हफ़्ते बीमार पड़ा रहा था। मुझे मिर्गी होती तो वहीं मर जाता।” वह पल भर में सँभल गया। “नहीं, यह जगह अच्छी है। रुको, रुको, सब लोग रुको।”
सब रुक गए।
“इस डरावने जंगल में घुसने से पहले, जब तक रेगिस्तान अभी हमारे पीछे है। फ़ेलिन। इधर आओ।”
“अब क्या है।” फिर भी वह आ गई।
“रैपसन!”
“सर!”
“यह लो।” उसने एक कैमरा उस नौजवान के हाथों में थमा दिया। “बी, जहाज़ को फ़्रेम में लाओ।”
“फ़्रेम में है, सर।”
“शूट करो, रैप्टर।”
उसने फ़ेलिन के कंधे पर बाँह डाली और पोज़ मार दिया।
“रैपसन, सर। रैप्टर नहीं।”
“ख़ूबसूरत।”
वे पेड़ों की ओर बढ़ चले।
उस हिस्से से गुज़रते हुए रेगिस्तान उन्हें खटकने लगा, हालाँकि यह समझने में वक़्त लगा कि क्यों। कक्षा से वह गोल दिखा था। मुर्दा ज़मीन का लगभग मुकम्मल घेरा, जिसे हर तरफ़ से हरियाली ने जकड़ रखा था, और इलाक़े की बनावट में ऐसा कुछ नहीं था जिससे उसकी वजह समझ आती।
यहाँ कभी कुछ नहीं उगा था। हाल में नहीं। कभी भी नहीं।
और पास जाने पर दिखा कि जंगल के चारों ओर घास का घेरा था, अगर उसे घास कहा जा सके। कमर से ऊपर तक ऊँची, खुरदरी, हल्की सलेटी झलक लिए, और किसी ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ नहीं।
“यह क्या बला है,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “पहले भी ऐसा ही था?”
“नहीं सर,” एक सिपाही ने कहा।
“फ़ेलिन?”
उसने अपना टैबलेट निकाल रखा था। “इसके हिसाब से यहाँ सड़कें हैं। हम एक बस्ती की ओर जा रहे हैं।” उसने स्क्रीन को देखकर माथे पर बल डाले, फिर टैबलेट रख दिया। “फ़िक्र मत करो। कोई न कोई वजह होगी।”
“किसी को घास काटने की मशीन साथ लाने की सूझी थी क्या?”
“बातें बंद करो और रास्ता खोलने में मेरी मदद करो।”
सिपाही लेज़र लेकर उस पर टूट पड़े।
काटने के साथ-साथ घास दोनों तरफ़ हटती गई, और जैसे-जैसे हटती गई, एक रास्ता उभरता गया। उनका काटा हुआ नहीं। पहले से मौजूद।
बातें थम गईं। बिना किसी हुक्म के हाथ हथियारों पर चले गए।
“मुझे यहाँ कुछ ठीक नहीं लग रहा,” फ़ेलिन ने कहा।
“क्या हुआ? कोबरा?” ट्रैस्कॉट के कंधे दबी हँसी से काँपने लगे। “वो वाला, बहुत बड़ा?”
“मैंने कहा था ना, वो बात कभी मत छेड़ना!!” वह पलटकर उस पर बरस पड़ी। “और वो चीज़ आधे जहाज़ जितनी बड़ी थी। वो साँप नहीं था, ट्रैस, दरिंदा था।”
“अच्छा, अच्छा, शांत हो जाओ, मज़ाक़ था। पर शिकार में मज़ा तो आया था, है ना?”
“ओह, कमाल का।”
उनके ऊपर टहनियाँ हिलीं।
ट्रैस्कॉट ने हथेली हवा में उठा दी। “तुमने सुना?”
सब रुक गए। हर हथियार उठ गया।
छतरी की ऊपरी तहों पर अँधेरे का राज था। उसी अँधेरे के बीच, ऊँची डालों पर, सैनिक लटके थे। वही वर्दी जो स्टेशन वालों की थी। गर्दन से लटके हुए, लेज़र की बटी हुई डोरियों पर।

“यह जगह तो पूरी हॉरर फ़िल्म है,” ट्रैस्कॉट फुसफुसाया।
“ज़रा चुप रहोगे। प्लीज़।”
“हा। शिट।”
“यहाँ क्या हुआ?” फ़ेलिन ने कहा।
“बी।” ट्रैस्कॉट की आवाज़ से सारी खनक ग़ायब हो चुकी थी। “क्या तुम ऊपर बैठे हमारे उन बेहद कूल दोस्तों तक ख़बर पहुँचा सकते हो कि उनके कई लोग इस वक़्त पेड़ों से झूल रहे हैं?”
“ज़रूर, सर। कनेक्ट करने की कोशिश कर रहा हूँ।”
वह कुछ देर कोशिश करता रहा। छतरी सिग्नलों को साबुत निगल जाती थी, और वे जितना अंदर जाते, हालत उतनी ही बिगड़ती जाती।
“सर, संपर्क नामुमकिन है। यहाँ एक भी डिवाइस को फ़्रीक्वेंसी नहीं मिल रही।”
ऊपर डालों में परछाइयाँ हिलीं। हवा से नहीं। रास्ते की सीध में, उनसे आगे-आगे।
“फ़ेल्ल्ल्ल,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “शायद हमें वाआआपस चलना चाहिए?”
“क्या हुआ, सुपर शिकारी ट्रैस्कॉट।” फ़ेलिन ने मुड़कर नहीं देखा। “डर गए?”
“हा। नहीं। ज़ाहिर है, नहीं।” वह हँसा। “मेरा मतलब, अहाहा, ज़ाहिर है, नहीं। काटते रहो, सज्जनो, चलो चलो।”
सिपाही काटते रहे। रास्ता चौड़ा होता गया।
“हमारे पास साज़ो-सामान है,” फ़ेलिन ने थोड़ी नरमी से कहा। “अगर यहाँ कोई वानर है जिसने कुछ आदमियों को लटका दिया, तो हम बरसों से ठीक ऐसी ही चीज़ों का शिकार करते आए हैं। तुम परेशान मत हो।”
“हाँ। हाँ, पता है। हमने क्या कुछ नहीं झेला।” फिर भी उसकी नज़रें दोबारा ऊपर उठ गईं। “बस, वो लोग इतने कूल थे, और फिर मैंने उन्हें पेड़ पर देखा, तो एक पल को झटका-सा लगा।”
फ़ेलिन मुस्कुराई।
जैसे-जैसे वे आगे बढ़े, घास छितरी होती गई, और उसके बीच की ज़मीन अब ख़ाली नहीं थी।
उन्हें बाक़ी सैनिक मिले। गिरने के लिए जुगत से टिकाए गए पत्थरों के नीचे कुचले हुए। गड्ढों में गिराए गए और तले में गड़े नुकीले खूँटों पर छोड़ दिए गए। चीरे हुए। जले हुए। उनके साथ और जो भी हुआ हो, ज़्यादातर के जिस्म में तीर धँसे थे।
“अरे, सत्यानाश।” ट्रैस्कॉट घूरता रह गया। “किसी क़बीले ने इनकी बलि-वलि चढ़ा दी क्या?”
“यह साफ़ तौर पर कोई आदिम क़बीला नहीं है,” फ़ेलिन ने कहा।
“हाँ। नहीं है। तीर आदिम नहीं हैं।” वह एक लाश के पास उकड़ूँ बैठ गया। “कोई इसे ग़लत मत समझना, पर मुझे इनका स्टाइल पसंद आया। काफ़ी कूल काम है।”
“सर,” थोड़ा आगे से एक सिपाही ने पुकारा। “यहाँ और लाशें हैं।”
फ़ेलिन तब तक एक तीर उठा चुकी थी। उसकी नोक एकदम चिकनी कटी थी, इतनी सफ़ाई से कि बहस की कोई गुंजाइश ही न बचे। लेज़र का काम।
“इस ज़मीन ने बहुत ख़ून पिया है,” ट्रैस्कॉट ने कहा।
“ये कस्टम-मेड हैं। हाई-टेक।” उसने तीर को रोशनी में घुमाया, और उसकी आवाज़ बदल गई, वैसे ही जैसे अपने मैदान में उतरते ही बदल जाती थी। “यह मेरा मैदान है। यह Tul-Ji का काम है, या Ash-Beta की कोई चीज़। मैंने दोनों से बहुत ख़रीदा है। धनुष-बाण उनसे बढ़िया कहीं नहीं बनते।” वह ठहरी। “हालाँकि हर सेर को कोई न कोई सवा सेर मिल ही जाता है।”

“मुझे तो धनुष और तीर का फ़र्क़ भी नहीं पता,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “मुझे बस ढंग का कोई विस्फोटक दे दो, और कुछ बढ़िया खिलौने।”
तभी उसकी नज़र एक निशान पर पड़ी। एक पेड़ के तने पर कोई आकृति थी, गहरी खुदी हुई और पुरानी।
एक हंस।

“आहा, यहाँ ऊपर तो एक नन्हा-सा हंस है। किसी आशिक़ ने पेड़ पर अपनी जानेमन उकेर दी।”
फ़ेलिन ने उसे उसी जानी-पहचानी नज़र से घूरा। पूरे तेवर के साथ।
“तुम्हें अपनी रनिंग कमेंट्री थोड़ी कम करने के बारे में सोचना चाहिए, ट्रैस।”
वह निशान के पास गई। “अब तक जो कुछ देखा है, उसमें शायद यही हमें यहाँ के लोगों के बारे में सबसे ज़्यादा बताता है। बी, इस पर स्कैनर चलाओ। देखें, यूनिवर्सल डेटाबेस में क्या है।”
“ज़रूर, सर।”
स्कैन का नतीजा जल्दी आ गया, और जो आया वह पुराना था। यह इलाक़े पर हक़ जताने वाला निशान था। बहुत पहले यह कहने का तरीक़ा हुआ करता था कि इस ज़मीन पर किसी का दावा है, और कोई अब भी इसे पेड़ों पर खोद रहा था, यानी यह दावा उनके लिए कुछ मायने रखता था।
“हम्म। तो ये अपने इलाक़े पर निशान लगाते हैं।” फ़ेलिन ने धीरे-धीरे सिर हिलाया। “वानर भी यही करते हैं। हम भी। यह उन गिनी-चुनी चीज़ों में से है जो सबमें एक जैसी हैं। काम की बात है।”
“बढ़िया, शानदार, काम की बात मिल गई,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “अब करें क्या?”
“आगे बढ़ते रहें।”
ऊपर डालों में किसी चीज़ ने आँखें खोलीं।
“हम जिस काम से आए हैं, उसी पर ध्यान रखेंगे,” फ़ेलिन ने कहा, हालाँकि अपनी आवाज़ को सधा हुआ रखने में उसे काफ़ी ज़ोर लगाना पड़ रहा था।
बिना कहे सिपाहियों ने घेरा बना लिया और ट्रैस्कॉट, फ़ेलिन और ब्रैंडन फ़्यूरी को उसके बीच में कर लिया।
“सर, यहाँ कुछ है!”
“हाँ, शुक्रिया, मैं अंधा नहीं हूँ, सिपाही।” ट्रैस्कॉट का सिर इधर-उधर घूमता रहा। “फ़ेएएएल?”
“सब शांत रहो। हम उनसे बात करने की कोशिश करेंगे।”
निगाहें इतनी देर तक उन पर टिकी रहीं कि यह महज़ शक नहीं रह गया।
“सर।” ब्रैंडन फ़्यूरी ने आवाज़ धीमी रखी। “मुझे ये हत्यारे लगते हैं। आपने देखा, उन्होंने उन आदमियों का क्या हाल किया। बात करने की जगह, शायद हमें इनसे इन्हीं की भाषा में बात करनी चाहिए।”
“बी, तुम्हारी राय की क़द्र करता हूँ, मेरे दोस्त, पर जंग छेड़ने के लिए इससे बुरा वक़्त हो ही नहीं सकता, इसलिए मैं चाहूँगा कि तुम अपना मुँह बंद रखो।”
“ज़रूर, सर।”
“मैं ट्रैस से सहमत हूँ,” फ़ेलिन ने कहा।
पेड़ से कुछ उतरकर नीचे आया।
जिस डाल से वह उतरा, वह इतनी ऊँची थी कि वहाँ से गिरकर किसी भी सैनिक की हड्डियाँ चूर-चूर हो जातीं। वह बिना किसी ज़ोर के, बिना आवाज़ के ज़मीन पर आया और उनके सामने सीधा खड़ा हो गया।
पीठ पर कैंची की तरह बँधी दो छोटी तलवारें। सिर पर हुड, कसकर बंद। उसके भीतर आँखों के सिवा कुछ नहीं, और आँखें चमक रही थीं।
फ़ेलिन सिपाहियों के बीच से रास्ता बनाती आगे बढ़ी। “सब मेरे पीछे रहो। मैं संपर्क करने की कोशिश करती हूँ।”
फिर भी ट्रैस्कॉट आगे बढ़कर उसके बग़ल में आ गया।
“आह। नमस्ते।” फ़ेलिन ने दोनों ख़ाली हाथ ऊपर उठाए। “क्या आप मेरी भाषा बोलते हैं? या अनुवाद कर सकते हैं?”
“सर, यूनिवर्सल ट्रांसलेटर ले आऊँ?” ब्रैंडन फ़्यूरी ने पीछे से चिल्लाकर पूछा।
फ़ेलिन ने उसकी बात अनसुनी कर दी और धीरे से एक क़दम और पास गई। ट्रैस्कॉट उसके साथ गया।
जब आवाज़ आई, तो वह एक औरत की थी।
“Vedui'।”
“हमारे यहाँ आने की वजह सीधी-सी है,” फ़ेलिन ने सँभलकर कहा। “इस ग्रह पर हमारा किसी से कोई लेना-देना नहीं है। मैं आपको वचन देती हूँ। हम जिस काम के लिए आए हैं, वह करेंगे और चले जाएँगे।”
“कम से कम, योजना तो यही है,” ट्रैस्कॉट बुदबुदाया।
“Vedui'।” फ़ेलिन ने लंबी साँस छोड़ी। “कमाल है।”
“सहमत हूँ, कमाल है,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “वह कह क्या रही है?”
“हम आपकी भाषा नहीं बोलते।” फ़ेलिन ने अपनी जैकेट में हाथ डाला। “पर मेरे पास कुछ है।”
उसने एक छोटा-सा उपकरण निकाला और कान में लगा लिया।
एक हाथ उठा। रुको।
“वाह,” ट्रैस्कॉट ने साँस खींचकर कहा। “तुम्हारे पिटारे से तो एक के बाद एक नगीने निकलते ही जा रहे हैं।”
“मैं तुम्हारी भाषा जानती हूँ, अजनबी।”
ये शब्द किसी ऐसे सुर में आए जो पूरी तरह ध्वनि भी नहीं था। फ़ेलिन ने कान से उपकरण निकाला और रख दिया।
आवाज़ जवान थी। उसके नीचे कुछ मिठास-सी बहती थी।
“बिन बुलाए आपके इलाक़े में घुस आने के लिए हमें माफ़ कीजिए,” फ़ेलिन ने कहा। “हम यहाँ बिल्कुल अजनबी हैं।”
“इसकी आवाज़ कितनी प्यारी है,” ट्रैस्कॉट फुसफुसाया।
“जब से हम आए हैं, पसंद आने लायक़ कुछ ख़ास नहीं देखा,” फ़ेलिन बोलती रही। “हालाँकि सच कहूँ तो, आते वक़्त जिन सैनिकों ने हमारा स्वागत किया, वे भी हमें कुछ ख़ास नहीं भाए।”
“कूल,” ट्रैस्कॉट ने कहा, “पर बेरंग। बोरिंग। इसकी मैं पुष्टि करता हूँ।”
फ़ेलिन उसकी ओर मुड़ी। उसके चेहरे से ट्रैस्कॉट कुछ भी भाँप नहीं पाया।
“क्या?”
वह आकृति दो क़दम आगे रोशनी में आई और उसने लबादा गिरा दिया।
वह स्याह थी। गहरे रंग की नहीं। ऐसी स्याह, जैसा शून्य होता है। उस स्याह रंग में जड़ी थीं दो चमकती आँखें, और एक मुस्कान, जिसके खुलते ही ख़ून सने दो नुकीले दाँत झलक उठते थे। उसकी त्वचा के कालेपन के नीचे एक लाली दौड़ती थी। सिर से सींग उठे थे, और उनके नीचे उसके कान नुकीले होते चले गए थे। टैटू उसके कॉलर से निकलकर चेहरे पर चढ़ आए थे, किसी बढ़ती बेल की तरह शाखाएँ फैलाते हुए, और साफ़ था कि वे उसके बाक़ी बदन पर भी नीचे तक गए थे।
उसके गले में एक ज़ंजीर से हंस लटक रहा था, किसी ऐसी धातु में गढ़ा हुआ जिसका नाम उनमें से कोई नहीं जानता था, और जिसकी क़ीमत उन्हें नीचे लाने वाली शटल से भी ज़्यादा थी।
“ज़रा देखो तो।” ट्रैस्कॉट की आवाज़ एक सप्तक ऊपर चढ़ गई। “यह तो मेरी एक्स है, हूबहू मिलेना, मतलब शक्ल मिलती है, पर यह वाली सच में कुछ और ही चीज़ है।”
“चुप रहोगे तुम,” फ़ेलिन फुफकारी।
जिन चीज़ों के नाम वे जानते थे, उनमें सबसे क़रीबी नाम था ‘एल्फ़’। उसकी बनावट वैसी ही थी। पर फ़र्क़ बारीक नहीं थे, और उनका मतलब क्या है, यह किसी ने आगे बढ़कर नहीं कहा।
“अहम-अहम।” फ़ेलिन सीधी हुई। “हम पहले भी एल्फ़ों से मिल चुके हैं, और उनसे मिलती-जुलती नस्लों से भी। हम एक कंपनी हैं जो घूम-घूमकर काम करती है। पर मुझे नहीं लगता कि हम कभी आपकी क़ौम के किसी व्यक्ति से मिले हैं।”
वह उन्हें परखती रही। जवाब नहीं दे रही थी। परख रही थी।
“मुझे याद रहता,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “इसका आप पूरा यक़ीन रखिए।”
फ़ेलिन बिना हिले-डुले खड़ी रही।
“जी भर के परखिए,” ट्रैस्कॉट ने कहा। “मैं एक लाजवाब नमूना हूँ, और औरतों के लिए मेरे मन में बेपनाह इज़्ज़त है, मोहतरमा।”
“उफ़, ट्रैस।”
“क्या?”
“बोलो।”
वह उनके चारों ओर चक्कर काटने लगी थी, और यह शब्द कहीं बग़ल से आया।
“मैं, या ये?”
“सर, मैं समझा सकता हूँ,” ब्रैंडन फ़्यूरी ने पीछे से चिल्लाकर कहा।
अब वह ट्रैस्कॉट के चारों ओर घूम रही थी।
“अगर पीछे से किसी ने भी चूँ तक की,” फ़ेलिन ने कहा, “तो उसे मैं ख़ुद फाँसी पर लटका दूँगी।”
“आह। नमस्ते। जी। इजाज़त हो तो।” ट्रैस्कॉट ने हाथ फैलाए। “हम एक कंपनी हैं। फ़ेलिन और मैंने इसे शुरू किया था। मेरा नाम ट्रैस्कॉट है। यह फ़ेलिन है, पीछे खड़े सब मेरे आदमी हैं, और वो मेरा हेल्म ऑफ़िसर है, ब्रैंडन फ़्यूरी।”
वह चक्कर काटती रही।
“हम ठेके लेते हैं। अधूरे काम निपटाना, रहस्य सुलझाना, वग़ैरह-वग़ैरह। रिकॉर्ड में तैंतालीस भारी क्रूज़र, पचहत्तर मिड-क्लास जहाज़, पाँच ज़मीनी क्रॉलर।”
हाथ फिर उठा। रुको।













